शनिवार, 20 अगस्त 2011

हाँ , मैं तुम से प्यार करता हूँ |


हाँ , मैं भी तुम से प्यार करता हूँ
आज मैं इकरार करता हूँ
देर से जाना,
मगर जाना
तुम्हीं से प्यार करता हूँ
हाँ , मैं तुम से प्यार करता हूँ |


तुम मुझे कहती रहीं
मेरा तुम प्यार हो,
सब समर्पित है
तुम ही को,
तुम मेरा संसार हो,
मैं रहा भटका
रंगीली वादियों में,
देर से जाना,
तुम ही जाना
मेरा संसार हो
हाँ , तुम ही मेरा प्यार हो |

तुम समर्पित ही रहीं
मुझ को
मेरे परिवार को
मेरे दुख में
रोई तुम
सुख में हँसी
कोई मेरे साथ
हो ना हो
तुम मेरे साथ थीं
तुम बनी
ज्यों मेरा परछाया
मुझे पर अब समझ आया
मैं सिर्फ़ तुम से
सिर्फ़ तुम से
कसम लो
सिर्फ़ तुम ही से
प्यार करता हूँ |

राजीव जायसवाल
२०/०८/२०११
मैं यह कविता अपनी प्रियतमा , अपनी पत्नी, अपनी सुख दुख की साथी वंदना को समर्पित करता हूँ|


1 टिप्पणी:

  1. आप दोनों की जोड़ी बनी रहे ........हमेशा खुश रहें .बेहतरीन अभिव्यक्ति

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