रविवार, 27 जनवरी 2013

ब्रह्म ज्ञानी--------



ब्रह्म ज्ञानी
सिम्ररे दिन रैन
ब्रह्म ज्ञानी
ब्रह्मा का ज्ञान
ब्रह्म ज्ञानी
मूंदत नहीं नैन
ब्रह्म ज्ञानी
जागृत  दिन रैन |


ब्रह्म ज्ञानी
छोटे से छोटा
ब्रह्म ज्ञानी
मोहित ना होता
 ब्रह्म ज्ञानी
सुखिया ना दुखिया
ब्रह्म ज्ञानी
जागृत  ही सोता |


ब्रह्म ज्ञानी
ना मोह, ना माया
ब्रह्म ज्ञानी
ना दुख की छाया
 ब्रह्म ज्ञानी
ना क्रोध, ना लोभा
ब्रह्म ज्ञानी
ना भोग , ना धोखा |
--------------राजीव 


शनिवार, 19 जनवरी 2013

जो दिखाए -देख लूँ |


जो दिखाए -देख लूँ 
जो सिखाए -सिख लूँ ,
जब बिठाए -बैठ लूँ ,
जब चलाए -चल  पडूं ।

जब बुलाए -बोल दूँ 
चुप कराए  -चुप रहूँ 
दुःख दिखाए -दुःख सहूँ ,
सुख दिखाए -खुश रहूँ ।

जिंदा  रखे --जी पडूं
मरना कह दे -मैं मरुँ ,
जो लिखाए  -मैं लिखूं ,
जो दिखाए -देख लूँ  ।

क्या मेरा मुझ में -क्या कहूँ
तेरा तुझ को सौंप दूँ ,
तू ही तू -तू ही कहूँ ,
मैं , मैं , मैं -  मैं न रहूँ  ।

राजीव
18/01/2013

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