गुरुवार, 27 सितंबर 2012

सब एकस से हैं |


सब
एकस से हैं
खावत हैं 
पीवत हैं 
जागत हैं 
सोवत हैं
गावत हैं 
रोवत हैं |

सब
चलती छाया से
सब
ठगनी माया से 
सब
दो पल  पाहुन से
सब
आवन जावन से |

सब ही
पैदा होवत
सब ही
पावत खोवत 
सब ही
दुःख में रोवत 
सब ही
माया से मोहत |

सब ही
माया भोगन
सब ही
रोगा रोग ण
सब ही
पल पल विनसे
सब ही
मरते हैं छि न से |

सब ही
तन सुख से चिपटे
सब ही 
लोलुपता  लिपटे
सब ही
कपटी औ झूठे 
सब ही
सच से हैं रूठे |

सब
एकस से हैं |

राजीव जायसवाल
२७/०९/२०१२ 





शनिवार, 15 सितंबर 2012


ना बात करो
ना चीत करो
ना अब तुम मुझ से
प्रीत करो
कोई और मिला है  तुम को क्या ?
तुम वही तो हो -   या और कोई
क्यों बदल गईं   -क्या बात हुई -   जो बिगड़ गईं   ,कोई और मिला है  तुम को क्या ?
क्यों हम से नाता तोड़ दिया  -क्यों साथ हमारा छोड़ दिया   -क्यों सारे वादे भुला दिए
कोई और मिला है  तुम को क्या ?
ना भला कहा
ना बुरा कहा ,
ना गले लगीं 
ना विदा कहा ,
ऐसे क्या जुदा
कोई होता ,
ऐसे क्या कोई
किसे खोता ,
ऐसे तुम कैसे बदल गईं ,
तुम मुझ से कैसे
बिछड गईं  ,
कैसे तुम मुझ से हुईं जुदा  |
कोई और मिला है  तुम को क्या ?




राजीव 

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गुरुवार, 13 सितंबर 2012

मेरा भी दर्द |

मेरा भी दर्द 
तुम्हारे दर्द से
कमतर तो नहीं
मेरा भी हाल
तुम्हारे हाल से
बेहतर तो नहीं |

तुम्हारे दर्द को
हमदर्द का साया तो मिला
तुम्हारे हाल को
क्या हाल 
कोई कहता तो मिला |

हम से पूछो कभी
किस तरह 
चोट खाए हैं
जख्म कितने हैं
खुद भी 
न जान पाए हैं |

राजीव




हर मानव है प्रभु का रूप ||


इस से मिल लूँ
उस से मिल लूँ |
न जाने किस किस से ,
मिल लूँ |
लोग लाख हैं ,
लोग करोड़  |
किस से मिलूं
किसे दूँ छोड़ |

मानव जन्म 
क्षणिक सा पाया |
कोटि पुण्य
धरा पर आया  |
हरेक रूप
निज नयन में ,
भर लूँ |
छाँव धूप
निज अंतर 
भर लूँ |

जिसे तकूँ
वह मनुज अनुप  |
हर मानव है
प्रभु का रूप |
आलिंगन 
जन जन का कर लूँ |
गठ बंधन 
मन मन का कर लूँ |

राजीव
१३/०९/२०१२



रविवार, 9 सितंबर 2012

तुम ने मुझ को छला |


तुम ने
मुझ को छला
मैंने
तुम्हारी याद के
हर पृष्ट को
दिया जला |

अब कौन तुम
मुझ को पता क्या
हो अजनबी 
जैसे कभी
न थी मिली |

था दोष मेरा 
या तुम्हारा 
किस को पता 
शायद रहा हो
भाग्य का 
जो साथ
तेरा न मिला |

राजीव
०८/०९/२०१२

शनिवार, 8 सितंबर 2012

मन ही मन को छलता है |


अंतर में होती जब पीड़ा
पीड़ा में सुख मिलता है ,
ये सुख मुझ को बहुत मिला है |

होता है जब मन एकाकी
मन ही मन को छलता है,
मैंने खुद को बहुत छला है |

 पीड़ा का सुख  पाया  हमने 
जलता दिया बुझाया हमने 
तुम क्या जानो पीड हमारी
सबसे दर्द छुपाया हमने |

आंसू पी कर हँसना सीखा
सब के आगे हँसता दिखा
तुम क्या जानो दर्द हमारा
सुख ने हम से किया किनारा  |
राजीव
०८/०९/२०१२ 

मन अधीर |


मन अधीर
सुन री पीर 
मन का साथ ,
मन का हाथ ,
कभी न छोड़ ,
मन से निज का ,
नाता जोड़ |

मन अधीर 
क्या है बात ,
किस की बाट ,
रहा ताक ,
कौन छोड़
गया साथ ,
याद करे
किस की बात |

मन अधीर
दर्द भेंट ,
किया कौन ,
किस की प्रीत 
कौन मीत ,
साथ छोड़ 
गया कौन ,
कुछ तो कहो
क्यों हो मौन |


राजीव
०८/०९/२०१२ 

रविवार, 2 सितंबर 2012

हर पल को जी ले रे |



आ रे , जा रे 
पी रे , खा रे 
मौज मना ले   रे 
खुद को भुला दे रे
प्रियतम की बाँहों में 
दो पल बिता ले रे 

दो दिन का   जीवन रे
हर पल  को   जी ले रे | |

गरवा लगा ले रे 
नैना लड़ा ले रे 
दिल दे रे 
दिल ले रे 
मनवा मिला ले रे 
दो दिन का जीवन रे 
हर पल को जी ले रे | |

बाँहों में ले ले रे 
सांसों में भर ले रे
होठों को तर कर रे
जो करना कर ले रे
मर जिस पे मरना रे
दो दिन का जीवन रे
हर पल को जी ले रे |

प्रियतम को पा ले रे
सेजवा  सजा ले रे
गोरिया के नयनों से 
कजरा चुरा ले रे
अधरों को अधरों पे
कुछ पल सजा ले रे
दो दिन का जीवन रे
हर पल को जी ले रे  |

राजीव
०१/०९/२०१२


कैसा ये प्यार कहो ----


जब चाहा , बात करी
जब चाहा  , मौन बनीं 
जब चाहा  ,गले लगीं
जब चाहा  ,दूर गयीं |

जब चाहा , साथ जगीं
जब चाहा , मिली नहीं
जब चाहा , प्रीत करी
जब चाहा  , रूठ गयीं  |

जब चाहा , पाती लिखी
जब चाहा , बनीं सखी 
जब चाहा , दूरी रखी
जब चाहा , गैर बनीं |

कैसा ये प्यार कहो
कैसा इकरार कहो
क्यों ये तकरार कहों
क्यों ये इज़हार कहो |

राजीव
०२/०९/२०१२


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