सोमवार, 29 जुलाई 2013

आस्था के चमत्कार -------The Miracle Of Faith

आस्था के चमत्कार |

7 September 2011 at 14:52
ईश्वर में सच्ची आस्था हो तो सब कुछ संभव होता है | जीवन में कई बार ऐसे प्रसंग देखने में आते हैं, जब हम हैरान रह जाते हैं |
मेरा आर्य समाजी परिवार में जन्म होने के कारण देवी ,देवता और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं था और मैं निराकार ईश्वर के अस्तित्व पर ही विस्वास करता था | मेरी पत्नी वंदना , सनातनी परिवार से हैं , और देवी, देवताओं और मूर्ति पूजा में विश्वास करती है | मैने भी कभी उन के विस्वास का विरोध नहीं किया | घर में ही एक छोटा सा मंदिर भी है, लेकिन मैं ध्यान ही करता था |
यह बात करीब दस वर्ष पूर्व की है | मैं और वंदना रात को खाने के बाद अपनी सोसाइटी में घूम रहे थे, की वंदना ने माता वैष्णो देवी जाने की इच्छा बताई| मैने भी टालते हुए कह दिया की -- लोग कहते हैं, जब माँ बुलाती हैं, तभी जाना हो पता है, जब तुम्हारा बुलावा आएगा, तभी जा पाओगी | श्रीमती जी, यह बात सुन कर चुप हो गई |

अगले दिन मैं अपने ऑफीस मैं था, की मेरे दोस्त डॉक्टर विजय लेखी का फोन आया | डॉक्टर लेखी अस्थि  विशेषग्य थे  और अब इस दुनिया में नहीं हैं | डॉक्टर लेखी ने पहले हाल चाल पूछा और फिर बोले-- क्या तुम को माता वैष्णो देवी चलना है ?
मैं यह सुन कर हैरान रह गया और मुझे वंदना के साथ पिछली रात को अपना कहा यह वाक्य याद आ गया की जब  माता का बुलावा आता है, तभी जाना हो पता है | मैने डॉक्टर से पूछा की कब जाना है , तो वे बोले--- कल सुबह ही जाना है, और अभी जवाब दो, कार की , होटेल की बुकिंग हो चुकी है | ,,मैने हैरान होते हुए , जाने के लिए हाँ कर दी |
मैने फिर वंदना को फोन किया और अगले दिन वैष्णो देवी जाने की बात बताई तो वो भी खुशी से हैरान हो गयी |

अगले दिन हम लोग वैष्णो देवी के लिए रवाना हो गये, कार , होटेल सब कुछ बुक थे, मुझे कुछ भी नहीं करना पड़ा |डॉक्टर लेखी ने सब इंतजाम कर रखा था | हम लोग की वैष्णो देवी यात्रा बहुत अच्छी रही|
हम लोग हैरान थे की एक रात पहले मैं और वंदना , जिस  माता की इच्छा की बात हम लोग एक रात पहले कर रहे  थे वो इच्छा अगले दिन ही सार्थक हो गयी |

राजीव जायसवाल

रविवार, 2 जून 2013

सुनो , मिल तो लो कभी |

सुनो ,
मिल तो लो कभी
दोस्त नहीं
दुश्मन ही सही ,
ऐसी भी क्या नाराजगी ,
सुनो
मिल तो लो कभी |

देखें तो तुम्हें
वैसी ही हो
या बदल गयीं
था प्यार कभी
वो बचा कुछ अभी
सुनो ,
मिल तो लो कभी |

तुम नाम मेरा
लिखती थीं कभी ,
मेहंदी में छुपा
हाथों में कहीं ,
मिट गया है वो
या बचा कुछ अभी ,
सुनो ,
मिल तो लो कभी |

सूरज ना सही
चंदा ना सही ,
तुम प्यार में जो
कहती थीं कभी ,
सब भूल गयीं
या याद कुछ अभी ,
सुनो ,
मिल तो लो कभी |

------------राजीव

01/06/2013

शनिवार, 18 मई 2013

गोपाल हरे -गोबिंद हरे |


मस्त  मलंग को
कीट  पतंग को
काले भुजंग को
अष्ट दिशान को
हाथी को, स्वान को
पाल करे ,
 प्रतिपाल करे
गोपाल हरे
गोबिंद हरे |

लोग लोगान को
राजा राजान को
रैंक फ़कीर को
सेठ अमीर को
पाल करे ,
 प्रतिपाल करे
गोपाल हरे
गोबिंद हरे |

रोगी को , भोगी को
संत को , योगी को
दुष्ट  दुष्टआन को
देव देवान को
जीव जिवान को
भूत भुतान को
पाल करे ,
 प्रतिपाल करे
गोपाल हरे
गोबिंद हरे |
---------------राजीव
17/05/2013

शनिवार, 27 अप्रैल 2013

तू ही तू -तू ही तू |


हे प्रभु
सब जगह पर
तू ही तू - तू ही तू
यहाँ भी है 
वहाँ भी है ,
जहाँ देखा 
वहाँ भी है ,
तू ही तू -तू ही तू | 

कोई बोले
निज़ अहम् से
तू नहीं है ,
नहीं है तू |
कोई बोले ,
हर जगह तू ,
तू ही तू -तू ही तू |

जिस घड़ी
मूंदा नयन को
ध्यान धर
सिम्ररा प्रभु ,
मेरा अंतर
मुझ से बोला ,
हर हृदय में 
बसता तू ,
तू ही तू -तू ही तू |
राजीव 
27./04/2013
O GOD,
THY PRESENCE IS EVERYWHERE
HERE AND THERE
BUT NO ONE CARES
TO FEEL YOUR PRESENCE.
TO FEEL YOUR ESSENCE.

SOME DEFINE YOU AS UNDEFINABLE
SOME OTHERS TRY TO DEFY YOUR PRESENCE
IN THEIR ARROGANCE.

BUT O POWER GREAT
WHENEVER I MEDITATE
MY INNER VOICE TELLS
TO SEARCH MYSELF
TO FEEL YOUR PRESENCE
TO FEEL YOUR ESSENCE.

RAJIV JAYASWAL

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

देखो देखो----------------------------


देखो देखो
मन को देखो
देखो देखो
तन को देखो
देखो
कोई विचार है क्या
देखो
कहीं , विकार है क्या
देखो
अंतर्मन को देखो |

देखो
धवल प्रकाश को देखो ,
देखो
नील आकाश को देखो ,
जल को देखो ,
थल को देखो  ,
देखो
हर स्थल को देखो |

देखो देखो
बचपन देखो ,
यौवन देखो ,
जीवन देखो ,  ,
देखो देखो
हर क्षण  देखो |

देखो
लाख सूर्य को  देखो ,
चंद्रमा देखो ,
तारे देखो   ,
देखो 
जग को सारे देखो |
देखो
देख देख ,
खो जाओ ,  ,
देखो 
ब्रह्म
ब्रह्म हो जाओ |

राजीव
12/04/2013

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

प्रणय निवेदन------------THE LOVE PROPOSAL


अब कहीं भी रोक कर मुझ को
 करो इज़हार अपने प्यार का,
 मैं मान जाउंगी |
भूल जाओ बात बीती,
 हारकर खुद को
तुम्हारा प्यार जीती |
जीत कर मुझ को
करो इज़हार अपने प्यार का
  मैं मान जाउंगी|
देख कर तुम को नहीं मैं देख पाई
 नयन में फिर भी
तुम्हारी छवि समाई,
 चूम कर मेरे नयन ,
करो इज़हार अपने प्यार का,
 मैं मान जाउंगी|
मैं प्रणय का अर्थसमझी देर से
 अब देर तुम क्योंकर रहे हो ,
 घेर कर मुझ को ,
 करो इज़हार अपने प्यार का
मैं मान जाउंगी|
---------------rajiv

Rajiv Jayaswal: मैं ही मैं , बस मैं ही मैं |

Rajiv Jayaswal: मैं ही मैं , बस मैं ही मैं |

Rajiv Jayaswal: मैं ही मैं , बस मैं ही मैं |

Rajiv Jayaswal: मैं ही मैं , बस मैं ही मैं |

सोमवार, 11 मार्च 2013

पास कभी , अब मत आना |

कभी
तुम बिन
एक पल
युगों सा था ,
अब तो
हर पल ,
तुम्हारे बिन
गुजरता है |

युग बीते
तुम मिलें नहीं
फिर भी हम को
गिले नहीं ,
अपनों से क्या गिला करें
ना मिलना
ना मिला करें |

अब हम
तुम को
भूल गए ,
तुम भी हम से
दूर गए ,
पास कभी
अब मत आना ,
चेहरा अब दिखलाना ना ,
बड़े यतन से भूलें हम ,
फिर से ना सम्भ्लेगा मन |
----------------राजीव

रविवार, 10 मार्च 2013

प्रेम परिभाषा -----Definition of Love .


प्रेम  परिभाषा
हर किसी को किसी की आसा
प्रेम क्या है
क्या कभी सोचा
युगों से प्रेम सब करते आए
पर है क्या प्रेम परिभाषा?

मन किसी से
मिलना चाहे बार बार
ना उसे देखे अगर तो ये लगे
दिन हो गया बेकार
समझ लो हो गया है प्यार|

जब किसी को देखते ही
दिल की धड़कन
तेज हो जाए
किसी के सामने
नज़रें उठाकर देखते ही
मन हो जाए बेकरार
समझ लो हो गया है प्यार|

जब कोई आवाज़ सुन कर
मन का बज उठे हर तार
किसी की बात को कर याद
ना सोए पूरी पूरी रात
समझ लो हो गया है प्यार|

जब किसी की हर बुराई
भी लगे अच्छी
दिलकश अदा लगने लगे
किसी का ग़लत भी व्यवहार
समझ लो हो गया है प्यार|

जब कोई हो दूर भी
पास का होने लगे अहसास
किसी के ख्याल बन कर ख्वाब
रात में पास ले आए
समझ लो गया है प्यार|
जिस के दूर जाने से
मन बार बार
यादों की फेरी लगाए
जिस के पास आने से
मन बावरा मोर बन
यादों के पंख लहराए
जिस  से रिश्ते का कोई नाम ना हो
तो भी
जिस को पाने का कोई ईनाम ना हो
तो भी
दोस्ती का प्यारा सा नाम देकर उसको
जिंदगी
जिंदगी भर का सहारा पा जाए
समझ लो
हो गया है प्यार |
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT----
PREM PARIBHASA
HAR KISI KO
KISI KI ASHA
PREM KYA HAI
KYA KABHI SOCHA
YUGON SE PREM
SAB KARTE AYE
PAR KYA HAI
PREM PARIBHASA.

MANN KISI SA
MILNA CHAHE
BAR BAR
NA USE DEKHE AGAR
TO YE LAGE
DIN HO GAYA BEKAR
SAMAJH LO
HO GAYA HAI PYAR.

JAB
KISI KO DEKHTE HI
DIL KI DHADKAN
TEJ HO JAYE
KISI KE SAMNE
NAJREIN UTHAKAR DEKHTE HI
MANN HO JAYE BEKARAR
SAMAJH LO
HO GAYA HAI PYAR.

JB
KOI AWAZ SUN KAR
DIL KA
BAJ UTHE HAR TAAR
KISI KO YAD KAR
NA SOYE
SARI SARI RAAT
SAMAJH LO
HO GAYA HAI PYAR.

JAB
KISI KI HAR BURAI BHI
LAGE ACHHI
LAGNE LAGE DILKASH
KISI KA GALAT BHI VYAVHAR
SAMAJH LO
HO GAYA HAI PYAR.
JAB
KOI HO DUR
TO BHI
PAAS HONE KA LAGE AHSAS
KISI KE KHYAL
BAN KAR KHWAB
RAAT MEIN PAAS AA JAEN
SAMAJH LO
HO GAYA HAI PYAR.

RAJIV JAYASWAL

<photo id="2" />
<photo id="3" />

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

जब तक साँस -------चले ये काया |


जब तक  साँस
चले ये काया ,
साँस गई
भइ खाक ये काया |

काहे मोह करे
रे   मूढा ,
साँस गई
भई देह ये  कूड़ा |

नित भटके
इत उत को  भागा ,
साँस गई
जली देह ये आगा |

सुंदर देह
करे बेचैना
साँस गई
भए बंद ये नयना {

जब लग साँस
तभी तक नाता ,
साँस गई
कोई मात , ना  भ्राता |

राजीव
21/02.2013

साँस , साँस
सिमर गोबिंद ,
मानव मूढ़ ,
भाया क्यूँ अंध |

रविवार, 27 जनवरी 2013

ब्रह्म ज्ञानी--------



ब्रह्म ज्ञानी
सिम्ररे दिन रैन
ब्रह्म ज्ञानी
ब्रह्मा का ज्ञान
ब्रह्म ज्ञानी
मूंदत नहीं नैन
ब्रह्म ज्ञानी
जागृत  दिन रैन |


ब्रह्म ज्ञानी
छोटे से छोटा
ब्रह्म ज्ञानी
मोहित ना होता
 ब्रह्म ज्ञानी
सुखिया ना दुखिया
ब्रह्म ज्ञानी
जागृत  ही सोता |


ब्रह्म ज्ञानी
ना मोह, ना माया
ब्रह्म ज्ञानी
ना दुख की छाया
 ब्रह्म ज्ञानी
ना क्रोध, ना लोभा
ब्रह्म ज्ञानी
ना भोग , ना धोखा |
--------------राजीव 


शनिवार, 19 जनवरी 2013

जो दिखाए -देख लूँ |


जो दिखाए -देख लूँ 
जो सिखाए -सिख लूँ ,
जब बिठाए -बैठ लूँ ,
जब चलाए -चल  पडूं ।

जब बुलाए -बोल दूँ 
चुप कराए  -चुप रहूँ 
दुःख दिखाए -दुःख सहूँ ,
सुख दिखाए -खुश रहूँ ।

जिंदा  रखे --जी पडूं
मरना कह दे -मैं मरुँ ,
जो लिखाए  -मैं लिखूं ,
जो दिखाए -देख लूँ  ।

क्या मेरा मुझ में -क्या कहूँ
तेरा तुझ को सौंप दूँ ,
तू ही तू -तू ही कहूँ ,
मैं , मैं , मैं -  मैं न रहूँ  ।

राजीव
18/01/2013

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.