शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

तुम ही मेरी |

तुम ही मेरी
सुरा औ साकी
तुम ही मेरी
मदिरा  प्याला
तुम मेरी
 मधु मधुशाला
तुम ही
मय की  हाला हो |

तुम ही मेरी
प्रणय देविका
तुम  ही मेरी
प्रीत चंद्रिका
तुम ही मेरी
नयन ज्योतिका |
तुम ही
ज्योति उजाला हो |

तुम ही मेरी
प्रेम प्रेरणा
तुम ही मेरी
प्रणय कामना
तुम ही मेरी
भाव भावना
तुम ही
काम की ज्वाला हो| |

राजीव
२०/०९/२०११



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मंगलवार, 13 सितंबर 2011

आज फिर याद आए तुम |

आज
फिर याद आए तुम
आज
फिर हम हुए गुमसुम
आज
फिर है उदासी सी
आज
फिर नज़र प्यासी सी |

आज
फिर दर्दे दिल जागा
आज
फिर मिलन की आशा
आज
फिर घटा सी छाई
आज
फिर  उन की याद आई |

आज
आ जाओ कैसे भी
अब ना
तरसाओ ऐसे भी |
भूल कर
पिछली सब बातें
साथ बीतें
अब सब रातें |

राजीव




बुधवार, 7 सितंबर 2011

चंचल मन |

एक दिवस , अमृत वाणी
एक दिवस, प्रेम कहानी
एक दिवस,ज्ञान योग
एक दिवस,प्रणय संयोग |

एक दिवस , क्रोध की ज्वाला
एक दिवस, शांत मधुशाला
एक दिवस,कर्म और धर्म
एक दिवस, बेहया बेशर्म |

एक दिवस , प्रभु की अनुकंपा
एक दिवस, ईश्वर में शंका
एक दिवस,सब धर्म समान
एक दिवस, स्वधर्म अभिमान |

एक दिवस , तलवार की धार
एक दिवस, कायर नर नार
एक दिवस, राधा और श्याम
एक दिवस, राही अंजान |

मानव मन के कितने रूप
एक  दिवस छाया, एक दिवस धूप
मन में देव, मन ही में भूत
एक दिवस राम, एक दिवस यमदूत |
राजीव

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

मुझे ना प्यार क्या तुम से ?

मुझ से बिन बोले
रह पाओगी क्या
मेरी खामोशी
सह पाओगी क्या
रात तुम तन्हा
सो पाओगी क्या
मुझ से तुम गुमसूम
रह पाओगी क्या |

चेहरा उतरा सा
कजरा बिखरा सा
नयन सूजे से
गाल फूले से
कितनी गुस्सा हो
है मुझे अहसास
ना अभी मानोगी
है मुझे अंदाज़ |

मुझ से रूठी हो
सज़ा मुझ को दो
खुद को तडपा कर
ज़ुल्म ऐसे ना करो
या कहो मुझ से
मुझे ना प्यार क्या तुम से |

राजीव जायसवाल
31/08/2011

सुबह तक |

आहट सी हुई
दिल के आँगन में
कौन आया है
आज प्रांगण में |
रात जागी है
बात बाकी है
सुबह तक करें
प्यार की बातें
तुम मुझे ले कर
मैं तुम्हें ले कर
अपनी बाहों में |

पास कोई ना हो
रात मदहोश हो
होश ,बेहोश हो
हम से तुम कुछ कहो
पल भी चुप ना रहो
मेरे पागल प्रणय
को भी हंस कर सहो |

भोर होने लगे
शोर होने लगे
तुम लिपट कर गले
साथ सोना प्रिय
दिन में सोते रहें
रात जगते रहें
लोग हम को
 दीवाना समझते रहें
हम जमाना दीवाना
समझते रहें |
राजीव
०२/०९/२०११



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