रविवार, 23 अक्टूबर 2011
आस्था के चमत्कार |
ईश्वर में सच्ची आस्था हो तो सब कुछ संभव होता है | जीवन में कई बार ऐसे प्रसंग देखने में आते हैं, जब हम हैरान रह जाते हैं |
मेरा आर्य समाजी परिवार में जन्म होने के कारण देवी ,देवता और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं था और मैं निराकार ईश्वर के अस्तित्व पर ही विस्वास करता था | मेरी पत्नी वंदना , सनातनी परिवार से हैं , और देवी, देवताओं और मूर्ति पूजा में विश्वास करती है | मैने भी कभी उन के विस्वास का विरोध नहीं किया | घर में ही एक छोटा सा मंदिर भी है, लेकिन मैं ध्यान ही करता था |
यह बात करीब दस वर्ष पूर्व की है | मैं और वंदना रात को खाने के बाद अपनी सोसाइटी में घूम रहे थे, की वंदना ने माता वैष्णो देवी जाने की इच्छा बताई| मैने भी टालते हुए कह दिया की -- लोग कहते हैं, जब माँ बुलाती हैं, तभी जाना हो पता है, जब तुम्हारा बुलावा आएगा, तभी जा पाओगी | श्रीमती जी, यह बात सुन कर चुप हो गई |
अगले दिन मैं अपने ऑफीस मैं था, की मेरे दोस्त डॉक्टर विजय लेखी का फोन आया | डॉक्टर लेखी अस्थि विशेषग्य थे और अब इस दुनिया में नहीं हैं | डॉक्टर लेखी ने पहले हाल चाल पूछा और फिर बोले-- क्या तुम को माता वैष्णो देवी चलना है ?
मैं यह सुन कर हैरान रह गया और मुझे वंदना के साथ पिछली रात को अपना कहा यह वाक्य याद आ गया की जब माता का बुलावा आता है, तभी जाना हो पता है | मैने डॉक्टर से पूछा की कब जाना है , तो वे बोले--- कल सुबह ही जाना है, और अभी जवाब दो, कार की , होटेल की बुकिंग हो चुकी है | ,,मैने हैरान होते हुए , जाने के लिए हाँ कर दी |
मैने फिर वंदना को फोन किया और अगले दिन वैष्णो देवी जाने की बात बताई तो वो भी खुशी से हैरान हो गयी |
अगले दिन हम लोग वैष्णो देवी के लिए रवाना हो गये, कार , होटेल सब कुछ बुक थे, मुझे कुछ भी नहीं करना पड़ा |डॉक्टर लेखी ने सब इंतजाम कर रखा था | हम लोग की वैष्णो देवी यात्रा बहुत अच्छी रही|
हम लोग हैरान थे की एक रात पहले मैं और वंदना , जिस माता की इच्छा की बात हम लोग एक रात पहले कर रहे थे वो इच्छा अगले दिन ही सार्थक हो गयी |
राजीव जायसवाल
06/09/2011
मेरा आर्य समाजी परिवार में जन्म होने के कारण देवी ,देवता और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं था और मैं निराकार ईश्वर के अस्तित्व पर ही विस्वास करता था | मेरी पत्नी वंदना , सनातनी परिवार से हैं , और देवी, देवताओं और मूर्ति पूजा में विश्वास करती है | मैने भी कभी उन के विस्वास का विरोध नहीं किया | घर में ही एक छोटा सा मंदिर भी है, लेकिन मैं ध्यान ही करता था |
यह बात करीब दस वर्ष पूर्व की है | मैं और वंदना रात को खाने के बाद अपनी सोसाइटी में घूम रहे थे, की वंदना ने माता वैष्णो देवी जाने की इच्छा बताई| मैने भी टालते हुए कह दिया की -- लोग कहते हैं, जब माँ बुलाती हैं, तभी जाना हो पता है, जब तुम्हारा बुलावा आएगा, तभी जा पाओगी | श्रीमती जी, यह बात सुन कर चुप हो गई |
अगले दिन मैं अपने ऑफीस मैं था, की मेरे दोस्त डॉक्टर विजय लेखी का फोन आया | डॉक्टर लेखी अस्थि विशेषग्य थे और अब इस दुनिया में नहीं हैं | डॉक्टर लेखी ने पहले हाल चाल पूछा और फिर बोले-- क्या तुम को माता वैष्णो देवी चलना है ?
मैं यह सुन कर हैरान रह गया और मुझे वंदना के साथ पिछली रात को अपना कहा यह वाक्य याद आ गया की जब माता का बुलावा आता है, तभी जाना हो पता है | मैने डॉक्टर से पूछा की कब जाना है , तो वे बोले--- कल सुबह ही जाना है, और अभी जवाब दो, कार की , होटेल की बुकिंग हो चुकी है | ,,मैने हैरान होते हुए , जाने के लिए हाँ कर दी |
मैने फिर वंदना को फोन किया और अगले दिन वैष्णो देवी जाने की बात बताई तो वो भी खुशी से हैरान हो गयी |
अगले दिन हम लोग वैष्णो देवी के लिए रवाना हो गये, कार , होटेल सब कुछ बुक थे, मुझे कुछ भी नहीं करना पड़ा |डॉक्टर लेखी ने सब इंतजाम कर रखा था | हम लोग की वैष्णो देवी यात्रा बहुत अच्छी रही|
हम लोग हैरान थे की एक रात पहले मैं और वंदना , जिस माता की इच्छा की बात हम लोग एक रात पहले कर रहे थे वो इच्छा अगले दिन ही सार्थक हो गयी |
राजीव जायसवाल
06/09/2011
मैं तेरी गोद में हूँ |
बहुत से लोग हैं
इस दुनिया में
बहुत हसीन
बहुत ज़हीन
बहुत कमसिन
और जाने क्या नहीं
एक हम हैं
नहीं, कुछ भी नहीं
ना ज़हीन
ना हसीन
ना कमसिन
ना हमारा कोई नाम
ना हम ने किया कोई काम
ना ही पाया हम ने
कोई मुकाम
ना ही हम
बन सके महान
ना ही बना सके
बड़े बड़े मकान
क्या किया हम ने
क्यों जन्म लिया हम ने |
बता दे मेरे प्रभु
क्यों किया ऐसा
ना रूप, ना रंग, ना रुपया, ना पैसा
क्यों किया ऐसा
बता ना
क्यों किया ऐसा |
सुन मेरे बच्चे
तू कैसी बात करता है
दिए माता, पिता
भाई, बंधु
प्यारी सी पत्नी
फूल से बच्चे
दोस्त , साथी
मान मर्यादा
कितना कुछ
तुझ को दिया
फिर भी शिकायत
मुझ से करता है
याद रख
सब को सभी कुछ
तो नहीं मिलता |
किसी को रूप मिलता
माता, पिता का सुख नहीं मिलता
किसी को पैसा मिलता
भोगने का सुख नहीं मिलता
किसी को नाम मिलता
दुख में कोई साथ खड़ा इंसान नहीं मिलता
कर क्षमा
मेरे प्रभु
उपकार तेरे भूल जाता हूँ
मैं पागल हूँ
नाम, रूप , रुपया
गाए जाता हूँ |
जो दिया
अच्छा दिया
वो ही दिया
मैं जिस के काबिल था
मैं तेरी गोद में हूँ
हे प्रभु
तू मेरा माता पिता है
संग साथी है
फिर मुझे परवाह क्या
शुक्रिया तेरा
हे प्रभु शुक्रिया |
राजीव
इस दुनिया में
बहुत हसीन
बहुत ज़हीन
बहुत कमसिन
और जाने क्या नहीं
एक हम हैं
नहीं, कुछ भी नहीं
ना ज़हीन
ना हसीन
ना कमसिन
ना हमारा कोई नाम
ना हम ने किया कोई काम
ना ही पाया हम ने
कोई मुकाम
ना ही हम
बन सके महान
ना ही बना सके
बड़े बड़े मकान
क्या किया हम ने
क्यों जन्म लिया हम ने |
बता दे मेरे प्रभु
क्यों किया ऐसा
ना रूप, ना रंग, ना रुपया, ना पैसा
क्यों किया ऐसा
बता ना
क्यों किया ऐसा |
सुन मेरे बच्चे
तू कैसी बात करता है
दिए माता, पिता
भाई, बंधु
प्यारी सी पत्नी
फूल से बच्चे
दोस्त , साथी
मान मर्यादा
कितना कुछ
तुझ को दिया
फिर भी शिकायत
मुझ से करता है
याद रख
सब को सभी कुछ
तो नहीं मिलता |
किसी को रूप मिलता
माता, पिता का सुख नहीं मिलता
किसी को पैसा मिलता
भोगने का सुख नहीं मिलता
किसी को नाम मिलता
दुख में कोई साथ खड़ा इंसान नहीं मिलता
कर क्षमा
मेरे प्रभु
उपकार तेरे भूल जाता हूँ
मैं पागल हूँ
नाम, रूप , रुपया
गाए जाता हूँ |
जो दिया
अच्छा दिया
वो ही दिया
मैं जिस के काबिल था
मैं तेरी गोद में हूँ
हे प्रभु
तू मेरा माता पिता है
संग साथी है
फिर मुझे परवाह क्या
शुक्रिया तेरा
हे प्रभु शुक्रिया |
राजीव
शनिवार, 22 अक्टूबर 2011
हर बंदा , रावण औ राम |
हर बंदे में
प्रेम भावना
हर बंदे में
प्रणय कामना
हर बंदे में
प्रभु बंदगी
हर बंदे में
है दरिंदगी |
हर बंदे में
एक कविता
हर बंदे में
एक रचियता
हर बंदे में
एक देवता
हर बंदे में
छिपा प्रेत सा |
हर बंदे में
छोटा सा बच्चा
हर बंदे में
आदम एक सच्चा
हर बंदे में
आकुल मन एक
हर बंदे में
रोगी तन एक |
हर बंदा
है गुण की ख़ान
हर बंदा
बोधिसत्व महान
हर बंदा
देवत्व स्वरूप
हर बंदा
कृतित्व अनूप |
हर बंदा
कोशिका का जाल
हर बंदा
परमाणु ख़ान
हर बंदा
एक जटिल शरीर
हर बंदा
हर बंदा
है संत कबीर |
हर बंदा
पावन ज्यों गंग
हर बंदा
नीचा औ नंग
हर बंदा
रावण औ राम
हर बंदा
कन्स औ श्याम
हर बंदा
निपट बकवास
हर बंदा
है प्रभु निवास |
राजीव
१७/१०/२०११
सोमवार, 17 अक्टूबर 2011
माया माया , मन भरमाया |
माया माया
मन भरमाया
योग , ध्यान
कुछ काम ना आया
जब माया ने
तीर चलाया
माया माया
मन भरमाया |
मन को कभी
काम ने घेरा
राम नाम का
रस बिसराया
कोमल बदन
काजर नयन
प्रेम पाश फँस
जानम प्रीत में
जन्म गँवाया
माया माया
मन भरमाया |
मन को कभी
रुपईया भाया
सुबह शाम
धन खूब कमाया
धर्म ना जाना
मर्म ना जाना
पैसा पैसा
पास में आया
अंत समय
जब चला बावरा
खाली हाथ
कुछ साथ ना जाया
माया माया
मन भरमाया |
राजीव
१८/१०/२०११
माया मुई, ना मन मुआ
मर मर गया शरीर
आशा तृष्णा
ना मरी
कह गये
दास कबीर |
Maya clings to the mind and causes it to waiver in so many ways.
O Lord, when you restrain someone from asking for wealth , then O Nanak , he comes to love the name.
O Lord, when you restrain someone from asking for wealth , then O Nanak , he comes to love the name.
SGGS
शुक्रवार, 23 सितंबर 2011
तुम ही मेरी |
तुम ही मेरी
सुरा औ साकी
तुम ही मेरी
मदिरा प्याला
तुम मेरी
मधु मधुशाला
तुम ही
मय की हाला हो |
तुम ही मेरी
प्रणय देविका
तुम ही मेरी
प्रीत चंद्रिका
तुम ही मेरी
नयन ज्योतिका |
तुम ही
ज्योति उजाला हो |
तुम ही मेरी
प्रेम प्रेरणा
तुम ही मेरी
प्रणय कामना
तुम ही मेरी
भाव भावना
तुम ही
काम की ज्वाला हो| |
राजीव
२०/०९/२०११
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सुरा औ साकी
तुम ही मेरी
मदिरा प्याला
तुम मेरी
मधु मधुशाला
तुम ही
मय की हाला हो |
तुम ही मेरी
प्रणय देविका
तुम ही मेरी
प्रीत चंद्रिका
तुम ही मेरी
नयन ज्योतिका |
तुम ही
ज्योति उजाला हो |
तुम ही मेरी
प्रेम प्रेरणा
तुम ही मेरी
प्रणय कामना
तुम ही मेरी
भाव भावना
तुम ही
काम की ज्वाला हो| |
राजीव
२०/०९/२०११
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मंगलवार, 13 सितंबर 2011
बुधवार, 7 सितंबर 2011
चंचल मन |
एक दिवस , अमृत वाणी
एक दिवस, प्रेम कहानी
एक दिवस,ज्ञान योग
एक दिवस,प्रणय संयोग |
एक दिवस , क्रोध की ज्वाला
एक दिवस, शांत मधुशाला
एक दिवस,कर्म और धर्म
एक दिवस, बेहया बेशर्म |
एक दिवस , प्रभु की अनुकंपा
एक दिवस, ईश्वर में शंका
एक दिवस,सब धर्म समान
एक दिवस, स्वधर्म अभिमान |
एक दिवस , तलवार की धार
एक दिवस, कायर नर नार
एक दिवस, राधा और श्याम
एक दिवस, राही अंजान |
मानव मन के कितने रूप
एक दिवस छाया, एक दिवस धूप
मन में देव, मन ही में भूत
एक दिवस राम, एक दिवस यमदूत |
राजीव
एक दिवस, प्रेम कहानी
एक दिवस,ज्ञान योग
एक दिवस,प्रणय संयोग |
एक दिवस , क्रोध की ज्वाला
एक दिवस, शांत मधुशाला
एक दिवस,कर्म और धर्म
एक दिवस, बेहया बेशर्म |
एक दिवस , प्रभु की अनुकंपा
एक दिवस, ईश्वर में शंका
एक दिवस,सब धर्म समान
एक दिवस, स्वधर्म अभिमान |
एक दिवस , तलवार की धार
एक दिवस, कायर नर नार
एक दिवस, राधा और श्याम
एक दिवस, राही अंजान |
मानव मन के कितने रूप
एक दिवस छाया, एक दिवस धूप
मन में देव, मन ही में भूत
एक दिवस राम, एक दिवस यमदूत |
राजीव
शुक्रवार, 2 सितंबर 2011
मुझे ना प्यार क्या तुम से ?
मुझ से बिन बोले
रह पाओगी क्या
मेरी खामोशी
सह पाओगी क्या
रात तुम तन्हा
सो पाओगी क्या
मुझ से तुम गुमसूम
रह पाओगी क्या |
चेहरा उतरा सा
कजरा बिखरा सा
नयन सूजे से
गाल फूले से
कितनी गुस्सा हो
है मुझे अहसास
ना अभी मानोगी
है मुझे अंदाज़ |
मुझ से रूठी हो
सज़ा मुझ को दो
खुद को तडपा कर
ज़ुल्म ऐसे ना करो
या कहो मुझ से
मुझे ना प्यार क्या तुम से |
राजीव जायसवाल
31/08/2011
रह पाओगी क्या
मेरी खामोशी
सह पाओगी क्या
रात तुम तन्हा
सो पाओगी क्या
मुझ से तुम गुमसूम
रह पाओगी क्या |
चेहरा उतरा सा
कजरा बिखरा सा
नयन सूजे से
गाल फूले से
कितनी गुस्सा हो
है मुझे अहसास
ना अभी मानोगी
है मुझे अंदाज़ |
मुझ से रूठी हो
सज़ा मुझ को दो
खुद को तडपा कर
ज़ुल्म ऐसे ना करो
या कहो मुझ से
मुझे ना प्यार क्या तुम से |
राजीव जायसवाल
31/08/2011
सुबह तक |
आहट सी हुई
दिल के आँगन में
कौन आया है
आज प्रांगण में |
रात जागी है
बात बाकी है
सुबह तक करें
प्यार की बातें
तुम मुझे ले कर
मैं तुम्हें ले कर
अपनी बाहों में |
पास कोई ना हो
रात मदहोश हो
होश ,बेहोश हो
हम से तुम कुछ कहो
पल भी चुप ना रहो
मेरे पागल प्रणय
को भी हंस कर सहो |
भोर होने लगे
शोर होने लगे
तुम लिपट कर गले
साथ सोना प्रिय
दिन में सोते रहें
रात जगते रहें
लोग हम को
दीवाना समझते रहें
हम जमाना दीवाना
समझते रहें |
राजीव
०२/०९/२०११
<photo id=1></photo>
दिल के आँगन में
कौन आया है
आज प्रांगण में |
रात जागी है
बात बाकी है
सुबह तक करें
प्यार की बातें
तुम मुझे ले कर
मैं तुम्हें ले कर
अपनी बाहों में |
पास कोई ना हो
रात मदहोश हो
होश ,बेहोश हो
हम से तुम कुछ कहो
पल भी चुप ना रहो
मेरे पागल प्रणय
को भी हंस कर सहो |
भोर होने लगे
शोर होने लगे
तुम लिपट कर गले
साथ सोना प्रिय
दिन में सोते रहें
रात जगते रहें
लोग हम को
दीवाना समझते रहें
हम जमाना दीवाना
समझते रहें |
राजीव
०२/०९/२०११
<photo id=1></photo>
शनिवार, 27 अगस्त 2011
GOD .
O GOD,
THY PRESENCE IS EVERYWHEREHERE AND THERE
BUT NO ONE CARES
TO FEEL YOUR PRESENCE.
TO FEEL YOUR ESSENCE.
SOME DEFINE YOU AS UNDEFINABLE
SOME OTHERS TRY TO DEFY YOUR PRESENCE
IN THEIR ARROGANCE.
BUT O POWER GREAT
WHENEVER I MEDITATE
MY INNER VOICE TELLS
TO SEARCH MYSELF
TO FEEL YOUR PRESENCE
TO FEEL YOUR ESSENCE.
RAJIV JAYASWAL
<photo id=1></photo>
<photo id=2></photo>
एक एक दिन को पकड़ लो |
एक एक दिन को पकड़ लो
बाहों में जकड लो
मुठी में बालू सा
फिसल फिसल जाता है
वक़्त गया वापिस ना आता है |
रोज सुबह जीते हैं
रात को मर जाते हैं
दिन के दावानल को
मेहनत के मेघ
भिगो जाते हैं
रात के सन्नाटे में
कोलाहल सपनों के
हम को जगा जाते हैं |
रोज नई आशाएँ
रोज नई चिंताएँ
गिर के संभल जाते हैं
फिर से फिसल जाते हैं |
सुंदर से सुन्दर भी
शख़्श बदल जाते हैं
अक्श बदल जाते हैं,
पतझड़ की कौन कहे
सावन के मेघ कभी
जीवन की बगिया पे
बिजली गिरा जाते हैं
अगन लगा जाते हैं |
बचपन कब हुआ युवा
बूढ़ा हो जाता है
अर्थी बन भट्टी में
भस्म हुआ जाता है
जब तक
ये अंतर्मन जागता है
वक़्त निकल जाता है |
हर पल के
स्पंदन को छू लो
अगले पल
दिल की ये धड़कन
हो भी या ना भी हो
इस चिंता को भूलो
आशाओं के झूले में झूलो
उँची से उँची
तुम उँचाई को छू लो |
राजीव जायसवाल
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT----
EK EK DIN KO PAKAD LO
BAHON MEIN JAKAD LO
MUTHHI MEIN BALU SA
FISAL FISAL JATA HAI
WAQT GAYA VAPIS NA ATA HAI.
ROJ SUBHA JITE HAIN
RAAT KO MAR JATE HAIN
DIN KE DAWANAL KO
MEHNAT KE MEGH
BHIGO JATE HAIN
RAAT KE SANNATE MEIN
KOLAHAL SAPNON KE
HUM KO JAGA JATE HAIN.
ROJ NAI ASHAIEN
ROJ NAI CHINTAEIN
GIR KE SAMBHAL JATE HAIN
PHIR SE PHISAL JATE HAIN.
SUDER SE SUNDER BHI
SAKSH BADAL JATE HAIN
AKSH BADAL JATE HAIN
PATJHAD KI KAUN KAHE
SAWAN KE MEGH KABHI
JIWAN KI BAGIYA PAR
BIJLI GIRA JATE HAIN
AGAN LAGA JATE HAIN.
BACHPAN KAB HUA YUVA
BUDHA HO JATA HAI
ARTHI BAN BHATTI MEIN
BHASM HUA JATA HAI
JAB TAK YE ANTARMAN JAGTA HAI
WAQT NIKAL JATA HAI.
HAR PAL KE SPANDAN KO CHU LO
AGLE PAL DIL KI YE DHADKAN
HO BHI YA NA BHI HO
IS CHINTA KO BHULO
ASHAON KE JHULE MEIN JHULO
UNCHI SE UNCHI
TUM UNCHAI KO CHU LO.
RAJIV JAYASWAL
बाहों में जकड लो
मुठी में बालू सा
फिसल फिसल जाता है
वक़्त गया वापिस ना आता है |
रोज सुबह जीते हैं
रात को मर जाते हैं
दिन के दावानल को
मेहनत के मेघ
भिगो जाते हैं
रात के सन्नाटे में
कोलाहल सपनों के
हम को जगा जाते हैं |
रोज नई आशाएँ
रोज नई चिंताएँ
गिर के संभल जाते हैं
फिर से फिसल जाते हैं |
सुंदर से सुन्दर भी
शख़्श बदल जाते हैं
अक्श बदल जाते हैं,
पतझड़ की कौन कहे
सावन के मेघ कभी
जीवन की बगिया पे
बिजली गिरा जाते हैं
अगन लगा जाते हैं |
बचपन कब हुआ युवा
बूढ़ा हो जाता है
अर्थी बन भट्टी में
भस्म हुआ जाता है
जब तक
ये अंतर्मन जागता है
वक़्त निकल जाता है |
हर पल के
स्पंदन को छू लो
अगले पल
दिल की ये धड़कन
हो भी या ना भी हो
इस चिंता को भूलो
आशाओं के झूले में झूलो
उँची से उँची
तुम उँचाई को छू लो |
राजीव जायसवाल
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT----
EK EK DIN KO PAKAD LO
BAHON MEIN JAKAD LO
MUTHHI MEIN BALU SA
FISAL FISAL JATA HAI
WAQT GAYA VAPIS NA ATA HAI.
ROJ SUBHA JITE HAIN
RAAT KO MAR JATE HAIN
DIN KE DAWANAL KO
MEHNAT KE MEGH
BHIGO JATE HAIN
RAAT KE SANNATE MEIN
KOLAHAL SAPNON KE
HUM KO JAGA JATE HAIN.
ROJ NAI ASHAIEN
ROJ NAI CHINTAEIN
GIR KE SAMBHAL JATE HAIN
PHIR SE PHISAL JATE HAIN.
SUDER SE SUNDER BHI
SAKSH BADAL JATE HAIN
AKSH BADAL JATE HAIN
PATJHAD KI KAUN KAHE
SAWAN KE MEGH KABHI
JIWAN KI BAGIYA PAR
BIJLI GIRA JATE HAIN
AGAN LAGA JATE HAIN.
BACHPAN KAB HUA YUVA
BUDHA HO JATA HAI
ARTHI BAN BHATTI MEIN
BHASM HUA JATA HAI
JAB TAK YE ANTARMAN JAGTA HAI
WAQT NIKAL JATA HAI.
HAR PAL KE SPANDAN KO CHU LO
AGLE PAL DIL KI YE DHADKAN
HO BHI YA NA BHI HO
IS CHINTA KO BHULO
ASHAON KE JHULE MEIN JHULO
UNCHI SE UNCHI
TUM UNCHAI KO CHU LO.
RAJIV JAYASWAL
इस शहर का अजब ही दस्तूर है |
इस शहर का अजब ही दस्तूर है
जो भी आता यहाँ पर
वो जाता ज़रूर है
उन को दरखतो शाख की चिंता लगी हुई
हर मोड़ पे है एक
काफिले जनाज़ा ज़रूर है |
कितने मेरे अपने यहाँ
मुझ से बिछड गये
कितने यहाँ बरसों जिए
एक रोज मर गए
कितने बुलंद हों
यहाँ टूटा गरूर है
जो भी यहाँ पैदा हुआ
मरता ज़रूर है |
वो रोज नए कितने ही
सपने सजाते थे,
चलते थे बहुत झूम कर
हंसते थे, गाते थे,
एक रोज ये क्या हो गया
वो ना मुस्कुराते हैं,
क्यों इस तरह से सो गए
ना जाग पाते हैं,
ऐसी भी नींद क्या हुई
कितना सताते हैं,
जो हर घड़ी हँसाते थे
क्यों अब रुलाते हैं ?
कोई तो हमें
शहर का दस्तूर बताए
ये कैसा तमाशा है
कोई तो बताए,
किस किस घड़ी जाना किसे
तय करता कौन है,
जिस की ये मिल्कियत है
मलिक वो कौन है ?
राजीव जायसवाल
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT------
IS SAHAR KA AJAB DASTUR HAI
JO BHI YAHAN PAR ATA HAI
VO JATA JARUR HAI
TUM KO DARAKHTO SAKH KI
CHINTA LAGI HUI
HUR MOD PAR HAI EK
KAFILE JANAJA JARUR HAI.
KITNE MERE APNE YAHAN
MUJH SE BICHAR GAYE
KITNE YAHAN BARSON JIYE
EK ROJ MAR GAYE
KITNE BULAND HO
YAHAN TUTA GARUR HAI
JO BHI YAHAN PAIDA HUA
MARTA JARUR HAI.
VO ROJ NAYE KITNE HI
SAPNE SAJATE THE
CHALTE THE BAHUT JHUM KE
HANSTE THE GATEY THE
EK ROJ YE KYA HO GAYA
NA VO MUSKURATE HAIN
VO IS TARHA SE SO GAYE
NA JAG PATE HAIN
AISI BHI NIND KYA HUI
KITNA SATATE HAIN
JO HAR GHADI HANSATE THE
VO AB KYON RULATE HAIN.
KOI TO HUMEIN SAHAR KA
DASTUR BATAE
YE KAISA TAMASHA HAI
KOI HUM KO SAMJHAE
KI KIS GHADI JANA KISE
TAY KARTA KAUN HAI
JIS SE HAREK PUCHTA YE BAT
MALIK VO KAUN HAI ?
RAJIV JAYASWAL
<photo id=1></photo>
जो भी आता यहाँ पर
वो जाता ज़रूर है
उन को दरखतो शाख की चिंता लगी हुई
हर मोड़ पे है एक
काफिले जनाज़ा ज़रूर है |
कितने मेरे अपने यहाँ
मुझ से बिछड गये
कितने यहाँ बरसों जिए
एक रोज मर गए
कितने बुलंद हों
यहाँ टूटा गरूर है
जो भी यहाँ पैदा हुआ
मरता ज़रूर है |
वो रोज नए कितने ही
सपने सजाते थे,
चलते थे बहुत झूम कर
हंसते थे, गाते थे,
एक रोज ये क्या हो गया
वो ना मुस्कुराते हैं,
क्यों इस तरह से सो गए
ना जाग पाते हैं,
ऐसी भी नींद क्या हुई
कितना सताते हैं,
जो हर घड़ी हँसाते थे
क्यों अब रुलाते हैं ?
कोई तो हमें
शहर का दस्तूर बताए
ये कैसा तमाशा है
कोई तो बताए,
किस किस घड़ी जाना किसे
तय करता कौन है,
जिस की ये मिल्कियत है
मलिक वो कौन है ?
राजीव जायसवाल
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT------
IS SAHAR KA AJAB DASTUR HAI
JO BHI YAHAN PAR ATA HAI
VO JATA JARUR HAI
TUM KO DARAKHTO SAKH KI
CHINTA LAGI HUI
HUR MOD PAR HAI EK
KAFILE JANAJA JARUR HAI.
KITNE MERE APNE YAHAN
MUJH SE BICHAR GAYE
KITNE YAHAN BARSON JIYE
EK ROJ MAR GAYE
KITNE BULAND HO
YAHAN TUTA GARUR HAI
JO BHI YAHAN PAIDA HUA
MARTA JARUR HAI.
VO ROJ NAYE KITNE HI
SAPNE SAJATE THE
CHALTE THE BAHUT JHUM KE
HANSTE THE GATEY THE
EK ROJ YE KYA HO GAYA
NA VO MUSKURATE HAIN
VO IS TARHA SE SO GAYE
NA JAG PATE HAIN
AISI BHI NIND KYA HUI
KITNA SATATE HAIN
JO HAR GHADI HANSATE THE
VO AB KYON RULATE HAIN.
KOI TO HUMEIN SAHAR KA
DASTUR BATAE
YE KAISA TAMASHA HAI
KOI HUM KO SAMJHAE
KI KIS GHADI JANA KISE
TAY KARTA KAUN HAI
JIS SE HAREK PUCHTA YE BAT
MALIK VO KAUN HAI ?
RAJIV JAYASWAL
<photo id=1></photo>
मदिरालय |
केवल कुछ दिन
शेष रह गये
इस जीवन के
अब तो जी लो,
यौवन की
छलकी मदिरा है,
होंठ लगा कर
मय को पी लो |
पाप नहीं
कुछ पुण्य नहीं है,
स्वर्ग यहीं है
नर्क यहीं है,
आओ, मदिरालय में
आ जाओ
जीवन के
दो चार पलों को
पल पल जी लो |
कैसी उलझन
कैसी भटकन,
ये जीवन ही
है बस जीवन,
बाद मरण के
जाने क्या हो,
अब तो जागो
अब तो जी लो |
बाँह पकड़ लो
जो साकी की,
बाँह ना छोड़ो,
पी लो
सारी मदिरा पी लो,
आओ, मदिरालय में
आ जाओ,
जी लो
इस जीवन को जी लो |
राजीव जायसवाल
THIS POEM PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT ALSO-----
KEWAL KUCH DIN SHESH RAH GAYE
ISH JIWAN KE
AB TO JI LO
YOVAN KI CHALKI MADIRA HAI
HONTH LAGA KAR
MAY KO PI LO.
PAP NAHIN KUCH PUNYA NAHIN HAI
SWARG YAHIN HAI
NARK YAHIN HAI
AAO MADIRALAYA MEIN AA JAO
JIWAN KE DO CHAR PALON KA
AMRIT PI LO.
KAISI ULJHAN KAISI BHATKAN
YE JIWAN HI , HAI BAS JIWAN
BAAD MARAN KE JANE KYA HO
AB TO JAGO
AB TO JI LO.
BANH PAKAD LO
JO SAKI KI
BANH NA CHORO
PI LO
SARI MADIRA PI LO
AAO MADHUSHALA MEIN
AA JAO
JI LO IS JIWAN KO
JI LO.
RAJIV JAYASWAL
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शेष रह गये
इस जीवन के
अब तो जी लो,
यौवन की
छलकी मदिरा है,
होंठ लगा कर
मय को पी लो |
पाप नहीं
कुछ पुण्य नहीं है,
स्वर्ग यहीं है
नर्क यहीं है,
आओ, मदिरालय में
आ जाओ
जीवन के
दो चार पलों को
पल पल जी लो |
कैसी उलझन
कैसी भटकन,
ये जीवन ही
है बस जीवन,
बाद मरण के
जाने क्या हो,
अब तो जागो
अब तो जी लो |
बाँह पकड़ लो
जो साकी की,
बाँह ना छोड़ो,
पी लो
सारी मदिरा पी लो,
आओ, मदिरालय में
आ जाओ,
जी लो
इस जीवन को जी लो |
राजीव जायसवाल
THIS POEM PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT ALSO-----
KEWAL KUCH DIN SHESH RAH GAYE
ISH JIWAN KE
AB TO JI LO
YOVAN KI CHALKI MADIRA HAI
HONTH LAGA KAR
MAY KO PI LO.
PAP NAHIN KUCH PUNYA NAHIN HAI
SWARG YAHIN HAI
NARK YAHIN HAI
AAO MADIRALAYA MEIN AA JAO
JIWAN KE DO CHAR PALON KA
AMRIT PI LO.
KAISI ULJHAN KAISI BHATKAN
YE JIWAN HI , HAI BAS JIWAN
BAAD MARAN KE JANE KYA HO
AB TO JAGO
AB TO JI LO.
BANH PAKAD LO
JO SAKI KI
BANH NA CHORO
PI LO
SARI MADIRA PI LO
AAO MADHUSHALA MEIN
AA JAO
JI LO IS JIWAN KO
JI LO.
RAJIV JAYASWAL
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धन गुरु गोबिंद सिंह |
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह
मां गुज़री के लाल
गुरु गोबिंद सिंह
दुष्ट जन के काल
गुरु गोबिंद सिंह
ख़ालसा के सृश्टा
गुरु गोबिंद सिंह
नवयुग के दृशटा
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
वारे चारों लाल
गुरु गोबिंद सिंह
हर हाल में खुशहाल
गुरु गोबिंद सिंह
धर्म के रक्षक
गुरु गोबिंद सिंह
पापी के भक्षक
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
तुम पे हम को नाज़
गुरु गोबिंद सिंह
धर्म के सरताज
गुरु गोबिंद सिंह
योग में योगी
गुरु गोबिंद सिंह
लेखनी के धनी
गुरु गोबिंद सिंह
धन गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
युग प्रवर्तक संत
गुरु गोबिंद सिंह
रचा दसम ग्रंथ
गुरु गोबिंद सिंह
हे पिता दस्मेश
गुरु गोबिंद सिंह
संत सिपाही वेश
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
THIS POEM IS PRESENTED BELOW IN ROMAN SCRIPT---
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH
MAA GUJRI KE LAL
GURU GOBIND SINGH
DUST JAN KE KAL
GURU GOBIND SINGH
KHALSA KE SRISHTA
GURU GOBIND SINGH
NAV YUG KE DRISHTA
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH.
VARON CHARON LAL
GURU GOBIND SINGH
HAR HAL MEIN KHUSHAL
GURU GOBIND SINGH
DHARM KE RAKSHAK
GURU GOBIND SINGH
PAPI KE BHAKSHAK
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH.
TUM PE HUM KO NAAJ
GURU GOBIND SINGH
DHARM KE SARTAJ
GURU GOBIND SINGH
YOG MEIN YOGI
GURU GOBIND SINGH
LEKHNI KE DHANI
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH
YUG PRAVARTAK SANT
GURU GOBIND SINGH
RACHA DASAM GRANTH
GURU GOBIND SINGH
HEY PITA DASHMESH
GURU GOBIND SINGH
SANT SIPAHI BHESH
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH.
RAJIV JAYASWAL
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धन धन गुरु गोबिंद सिंह
मां गुज़री के लाल
गुरु गोबिंद सिंह
दुष्ट जन के काल
गुरु गोबिंद सिंह
ख़ालसा के सृश्टा
गुरु गोबिंद सिंह
नवयुग के दृशटा
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
वारे चारों लाल
गुरु गोबिंद सिंह
हर हाल में खुशहाल
गुरु गोबिंद सिंह
धर्म के रक्षक
गुरु गोबिंद सिंह
पापी के भक्षक
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
तुम पे हम को नाज़
गुरु गोबिंद सिंह
धर्म के सरताज
गुरु गोबिंद सिंह
योग में योगी
गुरु गोबिंद सिंह
लेखनी के धनी
गुरु गोबिंद सिंह
धन गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
युग प्रवर्तक संत
गुरु गोबिंद सिंह
रचा दसम ग्रंथ
गुरु गोबिंद सिंह
हे पिता दस्मेश
गुरु गोबिंद सिंह
संत सिपाही वेश
गुरु गोबिंद सिंह
धन गुरु गोबिंद सिंह
धन धन गुरु गोबिंद सिंह |
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DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH
MAA GUJRI KE LAL
GURU GOBIND SINGH
DUST JAN KE KAL
GURU GOBIND SINGH
KHALSA KE SRISHTA
GURU GOBIND SINGH
NAV YUG KE DRISHTA
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH.
VARON CHARON LAL
GURU GOBIND SINGH
HAR HAL MEIN KHUSHAL
GURU GOBIND SINGH
DHARM KE RAKSHAK
GURU GOBIND SINGH
PAPI KE BHAKSHAK
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH.
TUM PE HUM KO NAAJ
GURU GOBIND SINGH
DHARM KE SARTAJ
GURU GOBIND SINGH
YOG MEIN YOGI
GURU GOBIND SINGH
LEKHNI KE DHANI
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH
DHAN DHAN GURU GOBIND SINGH
YUG PRAVARTAK SANT
GURU GOBIND SINGH
RACHA DASAM GRANTH
GURU GOBIND SINGH
HEY PITA DASHMESH
GURU GOBIND SINGH
SANT SIPAHI BHESH
GURU GOBIND SINGH
DHAN GURU GOBIND SINGH.
RAJIV JAYASWAL
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तलाश
कभी कभी ऐसा भी होता है
वही मिल जाता है
जो बार बार खोता है,
किसी तलाश में
हम उम्र भर भटकते हैं,
खुशी समझ के
उदासी के जाम पीते हैं.
कभी किसी को
कभी किसी को
तलाश करते हैं
किसी जीवन की चाह में
ता उम्र मरते हैं |
ना सच में होता है कुछ
झूठ भी नही होता.
किसी का साथ कभी
साथ ही नही होता,
ना इसके होते हैं हम
ओर ना उसके होते हैं,
ना जाने किस तलाश में
सभी को खोते हैं |
कहीं भी कोई नही है
जो हम को जान सके.
किसी को वक़्त नही है
जो हम को थाम सके.
की जिस तलाश ने
कितनो से रिश्ते जोड़ दिए.
उसी तलाश ने
सब रिश्ते नाते तोड़ दिए |
राजीव जायसवाल
वही मिल जाता है
जो बार बार खोता है,
किसी तलाश में
हम उम्र भर भटकते हैं,
खुशी समझ के
उदासी के जाम पीते हैं.
कभी किसी को
कभी किसी को
तलाश करते हैं
किसी जीवन की चाह में
ता उम्र मरते हैं |
ना सच में होता है कुछ
झूठ भी नही होता.
किसी का साथ कभी
साथ ही नही होता,
ना इसके होते हैं हम
ओर ना उसके होते हैं,
ना जाने किस तलाश में
सभी को खोते हैं |
कहीं भी कोई नही है
जो हम को जान सके.
किसी को वक़्त नही है
जो हम को थाम सके.
की जिस तलाश ने
कितनो से रिश्ते जोड़ दिए.
उसी तलाश ने
सब रिश्ते नाते तोड़ दिए |
राजीव जायसवाल
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