रविवार, 5 अगस्त 2012


कल  रात
मेघ भी थे ,
पवन भी थी ,
चाँद भी था ,
चमकते सारे सितारे भी 
गगन में थे ,
तुम नहीं
बस तुम नहीं थीं ,
ढूंढ़ ता तुम को रहा
मैं रात भर  |

मुझ को पता क्या था ,
छुपी थी तुम
मेरे भीतर  ,
मेरे अहसास में ,
मेरी हर श्वास में ,
मेरे हर रुदन में ,
मेरे अट्टहास में  ,
ह्रदय में मेरे ,
छुपी थी तुम ,
मुझ को पता क्या था  
मुझी में
छुप रहीं थी तुम |

राजीव
02/06/2012






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें