बुधवार, 30 नवंबर 2011

मैं सब में हूँ |

सब रोते हैं
सब हंसते हैं
सब सोते हैं
सब थकते हैं
सब खाते हैं
सब पीते हैं
जब तक दम हो
सब जीते हैं |

माँ के गर्भ से
सब आते हैं
गोद में रोते
सो जाते हैं
गिरते पड़ते
चल पाते हैं |
सब पढ़ते हैं
सब लिखते हैं
चलते फिरते
सब दिखते हैं |

जो सब में है
वो ही मुझ में
जो मुझ में है
वो ही सब में
मैं सब में हूँ
सब हैं मुझ में |

राजीव
26/11/2011
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1 टिप्पणी:

  1. जो मुझ में है
    वो ही सब में
    मैं सब में हूँ
    सब हैं मुझ में |

    सुन्दर अभिव्यक्ति ..

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